आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने अपने उपन्यास "अनामदास का पोथा" में कहा है की "नाम में क्या रखा है जो मर्ज़ी बुला लीजिये, नाम से ज्यादा काम की महिमा है।"
मेरा नाम चिन्मय सान्कृत है, भोपाल का रहने वाला हूँ और पढने लिखने में रूचि है। सिनेमा नामक विधा में रुझान है, इसलिए भारतीय फ़िल्म और टेलेविज़न संस्थान से पटकथा लेखन का डिप्लोमा किया है। फिलहाल वृत्तचित्र बनाने के साथ कुछ फिल्मो की पटकथाएं लिख रहा हूँ।
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